जसपुर। समीर परवेज़
उत्तराखंड में भले ही 2027 विधानसभा चुनाव में अभी समय हो, लेकिन जसपुर विधानसभा क्षेत्र में सियासी हलचल तेज़ होती नज़र आ रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने जमीनी स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। नेताओं के दौरों, कार्यकर्ता बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों से यह साफ हो रहा है कि 2027 की लड़ाई को लेकर अभी से रणनीति तैयार की जा रही है। भाजपा जहां केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस महंगाई, बेरोज़गारी, कानून-व्यवस्था और स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटी है।
विधायक पद के दावेदारों में बढ़ी हलचल
सूत्रों के मुताबिक, जसपुर विधानसभा सीट से दोनों प्रमुख दलों में विधायक पद के लिए कई चेहरे अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हुए हैं। भाजपा में जहां पुराने और संगठन से जुड़े नेताओं के साथ-साथ कुछ नए चेहरे भी सक्रिय हो रहे हैं, वहीं कांग्रेस में भी पूर्व प्रत्याशी, वरिष्ठ नेता और युवा नेतृत्व टिकट की दौड़ में माने जा रहे हैं। हाल के दिनों में क्षेत्र में नेताओं की सक्रियता, जनसंपर्क अभियान, सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़ती मौजूदगी और स्थानीय मुद्दों पर बयानबाज़ी और नगर में नेताओ की फलेक्सी पोस्टरो से उनकी संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
स्थानीय मुद्दे बनेंगे चुनाव की धुरी
जसपुर क्षेत्र में रोडवेज बस अडडा, खेल स्टेडियम, शहर में रोड पर अतिक्रमण, रोड जाम, अवैध पार्किग, बाजार चौक में शुक्र बाजार हटाकर अवैध पार्किग, वोटर आईडी की समस्याएं, बिजली-पानी, किसानों की दिक्कतें, सड़क-अस्पताल, युवाओं के लिए रोजगार, सूतमिल में सिडकुल निर्माण और शहरी,ग्रामीण विकास जैसे मुद्दे आगामी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। राजनीतिक दल इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर जनता को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
आने वाले समय में और तेज़ होगी सियासत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे 2027 नज़दीक आएगा, जसपुर की राजनीति और अधिक गर्माएगी। भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ अन्य दल भी अपनी भूमिका तलाश सकते हैं, जिससे मुकाबला और रोचक होने की संभावना है। फिलहाल जसपुर की जनता सब कुछ देख परख रही है और आने वाला समय ही तय करेगा कि 2027 में किसे जनता का भरोसा मिलता है।


